कामसूत्र : अध्याय 1 – प्रमाणकालभावेभ्योरतअवस्थापनाम

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कामसूत्र : अध्याय 1
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लिंग के आधार पर मनुष्य को निम्न तीन प्रकार की संज्ञा दी जाती है –

  1. छोटा आकार का लिंग -शशक (खरगोश) : लगभग 6 इंच
  2. माध्यम आकार का लिंग (बैल) : लगभग 8 इंच
  3. बड़े आकार का लिंग (घोडा) : लगभग 12 इंच

इसी प्रकार स्त्रियों को योनि कि गहराई के आधार पर नाम देते हैं जैसे –

  1. कम गहरी योनी – मृगी(हिरनी)
  2. साधारण गहरी योनी – घोड़ी
  3. ज्यादा गहरी योनी – हथिनी

अपने जोड़े के स्त्री और पुरुष के साथ सम्भोग करना “समरत” कहलाता है , यह तीन प्रकार का होता है –

  1.  शशक(खरगोश) पुरुष का मृग(हिरनी) स्त्री के साथ
  2. बैल(वृष) पुरुष का घोड़ी(बड़वा) स्त्री के साथ
  3. अश्व(घोडा) पुरुष का हस्तिनी(हथिनी) स्त्री के साथ

सम्भोग क्रिया के लिए एक जोड़े के सदस्य का दूसरे जोड़े के सदस्य के साथ बदलकर सम्भोग करना जैसे –

  • शशक(खरगोश) पुरुष का घोड़ी(बड़वा) स्त्री के साथ
  •  शशक(खरगोश) पुरुष का हस्तिनी(हथिनी) स्त्री के साथ
  •  बैल(वृष) पुरुष का मृग(हिरनी) स्त्री के साथ
  •  बैल(वृष) पुरुष का हस्तिनी(हथिनी) स्त्री के साथ
  •  अश्व(घोडा) पुरुष का  मृग(हिरनी) स्त्री के साथ
  • अश्व(घोडा) पुरुष का  मृग(हिरनी) स्त्री के साथ

यह 6 तरीके के होते हैं |

उच्चरत  

  • ज्यादा बड़े लिंग वाले पुरुष का छोटी योनी वाली स्त्री के साथ सम्भोग
  • माध्यम आकार वाले पुरुष का साधारण योनी वाली स्त्री के साथ सम्भोग

नीचरत 

  • ज्यादा गहरी योनी वाली स्त्री का छोटे आकार के लिंग वाले पुरुष के साथ सम्भोग
  • ज्यादा गहरी योनी वाली स्त्री का माध्यम आकार के लिंग वाले पुरुष के साथ सम्भोग
  • छोटे लिंग वाले पुरुष का साधारण योनी वाली स्त्री के साथ सम्भोग

इन सब तरह की सम्भोग क्रियाओं में अपने बराबर के जोड़े के लिंग वाले पुरुष के साथ सम्भोग करना चाहिए , उच्चरत और नीचरत को सबसे निचली सम्भोग क्रिया मन जाता है |

मध्यम सम्भोग में भी अश्व पुरुष का बड़वा स्त्री के साथ, वृष पुरुष का मृग स्त्री के साथ सम्भोग करना कुछ हद तक ठीक है परन्तु हस्तिनी स्त्री से वृष पुरुष का या बड़वा स्त्री का शशक पुरुष के साथ संभो किसी भी तरह सही नहीं कहा जा सकता |

अगर सिर्फ सम्भोग क्रिया में मिलने वाले सुख को ही सामने रखकर विचार करे तो निम्न तीन क्रियाए प्रमुख मानी जाती हैं –

  1. सीत्कार
  2. विलास 
  3. उपसर्ग

परन्तु सम्भोग क्रिया का असली आनंद स्त्री और पुरुष के स्वाभाव, शरीर के बनावट, और जननेन्द्रियो की बनावट पर ज्यादा निर्भर करता है |
अतः पुरुषों के लिंग का मापन लिंग के लम्बाई और मोटाई से तथा स्त्री की योनी का मापन इसकी गहराई एवं चौड़ाई से किया जाता है | चरम सुच पाने के लिए स्त्री व् पुरुष दोनों को चाहिए कि अपनी आकार वाले लिंग अथवा योनी के साथ ही सम्भोग करे |

इसके अंतर्गत कामजन्य मानसिक आवेश के अनुसार पुरुष और स्त्री के सम्भोग के भेद बताये गए हैं –

  1. मंद वेग- सम्भोग क्रिया में जिस समय काम उत्तेजना बहुत कम होती है उस समय वीर्य बहुत कम निकलता है और स्त्री के द्वारा अपने शरीर पर नखक्षत (नाखूनों को गडाना) और दन्तक्षत (दांतों को गडाना) आदि प्रहारों को सहने में असमर्थ हो तो वह मंद वेग कहलाता है |
  2. मध्यम वेग- मध्यम सम्भोग की इक्षा और मध्यम नखक्षत एवं दन्तक्षत प्रहार
  3. चंद वेग– तीव्र सम्भोग की इक्षा और तेज नखक्षत एवं दन्तक्षत प्रहार

आचार्य के अनुसार, सम्भोग क्रिया में स्त्रियों को पुरुषों की तरह सुख प्राप्त नहीं होता है | फिर स्त्री किस कारण से सम्भोग क्रिया में लीन होती है !

  1. पुरुष के साथ संघर्षण (सम्भोग करने से) से स्त्री की खुजली दूर हो जाती है |
  2. स्त्री की खुजली चुम्बन, आलिंगन और प्रहार से उत्पन्न होने वाली उत्तेजना से भी दूर हो जाती है

स्त्री और पुरुष द्वारा स्थापित सम्भोग के आनंद को शब्दों में नहीं बया किया जा सकता | अतः कैसे मान ले कि स्त्री को पुरुष की तरह सम्भोग का चरम सुख प्राप्त नहीं होता है ?

आचार्य औद्दालिक के अनुसार पुरुष की उत्तेजना सम्भोग क्रिया के दौरान एक बार स्खलित होने से समाप्त हो जाती है और उसे स्त्री की जरूर नहीं रहती परन्तु स्त्रियों में ऐसी प्रवृत्ति नहीं रहती है |
जो पुरुष सम्भोग क्रिया को बहुत जल्दी जल्दी और देर तक करता है उनसे स्त्रिया बहुत लगाव रखती है परन्तु जो पुरुष शीघ्र स्खलित हो जाते है उनकी स्त्रिया बहुत निंदा करती हैं  अतः यदि स्त्री पुरुष को बहुत प्रेम कर रही हो तो पुरुष को समझ जाना चाहिए कि उसे सम्भोग का पूर्ण सुख मिल रहा है |

पुरुष/स्त्री जिस समय स्खलित होता है उस समय उसे चरम सुख की अनुभूति होती है और स्खलन हो जाने के बाद सारे आनंद की समाप्ति हो जाती है |

यदि स्त्री सम्भोग के लिए इक्षित ना हो तो उसे कभी गर्भ नहीं ठहर सकता |

संभोग क्रिया के दौरान मिलने वाले भेद 

  1. अवस्था भेद – सम्भोग क्रिया के दौरान मानसिकता यही होती है कि पुरुष (करने वाला) है और स्त्री (कराने वाली) परन्तु सम्भोग  में कोई अंतर नहीं होता है |
  2. स्खलन – स्त्री और पुरुष दोनों को सम्भोग क्रिया के दौरान बराबर सुख की अनुभूति होती है इसलिए सम्भोग के समय चुम्बन, आलिंगन और स्तनों को दबाना आदि बाहरी सम्भोग द्वारा स्त्री को इस तरह से द्रवित करना चाहिए कि स्त्री पुरुष से पहले चरम सुख तक पहुँच जाये फिर अपनी सम्भोग करने की इक्षा को पूरी करने के लिए तेज गति से सम्भोग करना चाहिए |

प्रेम 4 प्रकार से उत्पन्न होता है –

  1. अभ्यास से – जो प्रेम करने से बढ़ता है उसे अभ्यासिकी कहते है जैसे शिकार, संगीत, नृत्य नाटक आदि | यह प्रेम विषयों से होने वाले प्रेम से भिन्न होती है |
  2. विचारों से – किसी अभ्यास को किये बिना सिर्फ सोचने से जो रेम उत्पन्न होता है उसे अभिमानी कहा जाता है |यह प्रेम भी विषय प्रेम से भिन्न होता है |
  3. याद रखने से – अचानक ऐसे इंसान को देखकर जिसकी सूरत उस इंसान से मिलती हो जिसे आप बहुत पसंद करते थे तो आपको उसी की याद आ जाती है , इसको सम्प्रयात्मक प्रीति कहा जाता है |
  4. विषयों से – वैश्याओं तथा किन्नरों(हिजड़ो) को मुख मैथुन करने में जिस तरह का सुख मिलता है वह मानसिक कहलाता है, इसी तरह चुम्बन – आलिंगन से उत्पन्न प्रीति भी होती है |

स्त्री एवं पुरुष दोनों को चाहिए कि उपरोक्त चारों प्रकार के प्रेम को अपने जीवन में उतारने का प्रयास करे |

मित्रो अगला अध्याय जल्द ही प्रेषित होगी अगर आपको कामसूत्र का ये अध्याय पसंद आया तो KamaSutraBlog.Com को अपने दोस्तों के साथ शेयर करना ना भूले |

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