जब बात सेक्स और रिश्तों की आती है तो क्या होता है

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क्या हुकअप सभ्यता अमरीकी महिलाओं को तबाह कर रही है? जब बात सेक्स और रिश्तों की आती है तो चीज़ें वैसी नहीं रहती जैसी की लगती हैं। क्या भारत व्यभिचारी बन गया है?

संकोच से अतिआधुनिकता की ओर?

जहाँ एक तरफ भारत ने ‘कामसूत्र’ के रूप में विश्व को सेक्स से जुड़ा सबसे प्रतिष्टित ग्रन्थ भेंट किया, वहीँ दूसरी ओर एक राष्ट्र के तौर पर अभी भी सेक्स को लेकर हमारा रुख काफी रुढ़िवादी ही है। हालाँकि इस मासूमियत का भी अपना एक मज़ा है, लेकिन ‘हाउ टु किस’ इस देश का गूगल पर सबसे ज्यादा खोजा जाने वाला ‘हाउ टु…’ विषय है।

परन्तु हाल ही में हूए दसवे वार्षिक इंडिया टुडे सेक्स सर्वे में करीब 5000  हज़ार लोगों के मतों के आधार पर भारत की ‘ संकोच से अधिकता’ का आंकलन किया गया। यह सर्वे सिर्फ बडे शहरों तक सीमित नहीं था।

सर्वे के नतीजे वाकई आश्चर्यचकित कर देने वाले हैं: रतलाम शहर के सर्वे के अनुसार 11 प्रतिशत लोग ‘थ्रीसोमे’ (एक समय पर 3  लोगों का सेक्स में संलिप्त होना) का अनुभव रखते हैं। 14  प्रतिशत लोगो को समलैंगिकता से परहेज नहीं, चाहे उनका जीवनसाथी ही इस में लिप्त क्यूँ न हो। कोटा में सर्वे के दौरान 63  प्रतिशत लोगों ने बताया की वो गुदा मैथुन अनुभव कर चुके हैं।

लेकिन कुछ और आंकड़े ये साबित करते हैं की ये ‘अधिकता’ कहीं मिथ्या तो नहीं- विज्ञानं से ज्यादा जन्व्यव्हार। छोटे शेहेरों में रहने वाली लड़कियों में से 21  प्रतिशत लड़की किशोरावस्था से पहले सेक्स अनुभव कर लेती हैं।

जबकि बडे शहरों में ये संख्या है 13  प्रतिशत। शायद इसलिए की छोटे शहरों में विवाह भी जल्दी कर दिया जाता है. बहेर्हाल 70  प्रतिशत पुरुष चाहते हैं की उनकी पत्नी ‘वर्जिन'(जिसने पहले सेक्स न किया हो) हो।

‘अपमान से शक्तिमान तक’?

अम्रीका में ‘हुक अप’ (अनौपचारिक सेक्स) सभ्यता सेक्स क्रांति के फेलियर का प्रतीक बन गया है। इस सभ्यता का हिस्सा युवा लड़कियां भी हैं जो लगभग लड़कों की ही भांति अनौपचारिक सेक्स की तलाश में हैं। इसके चलते ‘डेटिंग’ अब कल की सी बात हो चली है।

“वे इतनी आक्रामक हैं की लगता है मानो इनका दिल लोहे का है। मेरे देश में ऐसी लड़कियों को वेश्या के सामान मन जायेगा,” अर्जेंटीना की एक युवती का कहना है। द अटलांटिक में छपे लेख की लेखिका हाना रोजिन का कहना है ये अनौपचारिक रवैया मेहेत्वकंशी महिलाओं के शक्तिशालो होने का प्रतिक है।

संजीदा बॉयफ्रेंड का होना 19 वीं सदी में आकस्मिक गर्भधारण के सामान होने लगा है- जिससे हल हाल में बचा जाता था जब तक की ये  उज्जवल भविष्य के लिए आवश्यक न हो।”

“गहन अध्यान और रिसर्च ये बताती है की ये ‘हुक अप’ सभ्यता आगे चलकर महिलाओं को इस बात का फायदा देती है की वो बिना संकोच के अनौपचारिक शारीरिक सम्बन्ध का लुत्फ़ उठाती हैं। और ये महज अनौपचारिक रिश्ते उनके भविष्य की प्लानिंग में आड़े नहीं आते,’ रोजिन लिखती हैं।

“असल में, मोटे तौर पर ये कहना की युवा वर्ग सेक्स में ज्यादा लिप्त है- गलत होगा। आज के किशोरों की असुरक्षित सेक्स के कारन गर्भधारण की सम्भावना उनके पेरेंट्स के समय से कहीं कम है. 1988  से 2010  के बीच किशोरावस्था में सेक्स करने वाली युवतियों की संख्या 37% से घटकर 27% हो गयी है।”

और इस पूरी कहानी से जुड़ा एक रोचक तथ्य है अमेरिका में 1993  से 2008  के बीच 70 %कमी आना है। ‘महिलाओं ने शक्तिशाली होने का वो दर्ज हासिल कर लिया है की अब उन्हें इस प्रकार की घटनाओं का निशाना बनाना संभव नहीं,” एक अपराध विशेषज्ञ ने रोजिन को बताया।

रोजिन ये भी बताती हैं की सर्वे के अनुसार अम्रीका में कॉलेज विद्यार्थियों में से 90% आगे चलकर शादी करने की इच्छा रखते हैं। ये तो मासूमियत के एक नए युग की शुरुवात जैसा लगता है। तो अम्रीका के लिए अगला कदम क्या है? गूगल पर ‘हाउ टू किस’ टॉपिक की खोज में बड़ी वृद्धि?

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